शिवा शर्मा केस पर अखिलेश यादव का बड़ा बयान, सरकार पर उठाए सवाल
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कैफे संचालक शिवा शर्मा की मौत का मामला अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार, 20 अक्टूबर को इस मामले को लेकर राज्य सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि यह कोई सामान्य मामला नहीं है और इसके चलते उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर भी संकट आ सकता है।
अखिलेश यादव ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए वर्ष 2020 में हुए विकास दुबे एनकाउंटर का जिक्र किया। उनके बयान के बाद शिवा शर्मा की मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। हालांकि, सरकार गिरने की आशंका संबंधी यह अखिलेश यादव का राजनीतिक दावा है, कोई स्थापित तथ्य नहीं।
विकास दुबे एनकाउंटर का जिक्र कर क्या बोले अखिलेश?
शिवा शर्मा की कथित लिव-इन पार्टनर श्रद्धा दुबे को लेकर सवाल पूछे जाने पर अखिलेश यादव ने पुलिस और सरकार पर तंज कसा। उन्होंने कहा, “न्याय मिलना चाहिए। याद रखिए, गाड़ी पलटी नहीं थी, सरकार गिरने से बच गई थी।”
उनका यह बयान जुलाई 2020 में गैंगस्टर विकास दुबे की पुलिस मुठभेड़ की ओर इशारा था। विकास दुबे को मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश लाया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, रास्ते में वाहन पलट गया था और इसके बाद हुई मुठभेड़ में विकास दुबे की मौत हो गई थी।
अखिलेश यादव ने शिवा शर्मा के मामले को भी गंभीर बताते हुए दावा किया कि इसमें प्रभावशाली लोगों के संबंधों की जांच की जरूरत है। उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी और पुलिस की भूमिका पर सवाल
अखिलेश यादव ने मामले की मुख्य आरोपी बताई जा रही श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी में हुई देरी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने मीडिया कवरेज पर टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि अलग-अलग समाचार चैनल इस मामले में अलग-अलग पक्षों की तरह दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने श्रद्धा दुबे के फरार रहने के दौरान मीडिया को दिए गए कथित बयानों का भी उल्लेख किया। अखिलेश ने यह सवाल उठाया कि जब आरोपी फरार थी, तब उसे मीडिया में अपनी बात रखने का अवसर कैसे मिला और पुलिस उसे समय पर गिरफ्तार क्यों नहीं कर पाई।
इस मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। जांच एजेंसियों का काम आरोपों की जांच करना और उपलब्ध सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई करना है।
क्या है शिवा शर्मा की मौत का मामला?
शिवा शर्मा की 9 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के हजरतगंज थाना क्षेत्र में एक अपार्टमेंट की बालकनी से गिरने के बाद मौत हो गई थी। शुरुआती तौर पर घटना को हादसे के रूप में देखा गया, लेकिन परिवार की शिकायत और लगाए गए आरोपों के बाद मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया।
शिवा के परिवार का आरोप है कि उनकी पिटाई की गई और उन्हें प्रताड़ित करने के बाद इमारत से नीचे फेंका गया। उनकी मां रंजना शर्मा ने आरोपियों की गिरफ्तारी और न्याय की मांग की थी।
दूसरी ओर, श्रद्धा दुबे ने मीडिया में दिए गए अपने कथित बयान में शिवा की मौत में किसी भूमिका से इनकार किया था। उसने दावा किया था कि शिवा ने खुद बालकनी से छलांग लगाई थी और वह आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा था। ये दोनों पक्षों के दावे हैं; घटना की वास्तविक परिस्थितियों का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया से होगा।
मामले में अन्य लोगों के नाम भी आए
इस मामले में श्रद्धा दुबे के अलावा उनकी बहन रश्मि दुबे, ड्राइवर तनवीर अली उर्फ दानिश और अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने नागपुर में कार्रवाई करते हुए श्रद्धा दुबे, उनकी बहन और ड्राइवर को गिरफ्तार किया।
पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि घटना के समय क्या हुआ, इसमें किसकी क्या भूमिका थी और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के समर्थन में कौन-से सबूत मौजूद हैं। आरोप लगना अपने आप में किसी व्यक्ति का दोष साबित नहीं करता।
CJP नेताओं की रिहाई की मांग भी उठाई
अखिलेश यादव ने अपने बयान में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई की मांग भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों को गलत तरीके से हिरासत में रखा गया है और इसे कानून तथा संविधान के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं बताया।
अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर भाजपा सरकार की आलोचना की। उनके आरोपों पर संबंधित पक्ष का जवाब और मामले से जुड़े आधिकारिक विवरण अलग से देखना जरूरी है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच जांच पर टिकी नजरें
शिवा शर्मा की मौत के मामले में परिवार के आरोप, श्रद्धा दुबे का पक्ष और पुलिस की जांच—तीनों महत्वपूर्ण हैं। अखिलेश यादव ने इसे राज्य सरकार के लिए गंभीर राजनीतिक मामला बताया है, जबकि सरकार के भविष्य पर उनका दावा फिलहाल एक राजनीतिक टिप्पणी है।
अब इस मामले में जांच से सामने आने वाले तथ्य, उपलब्ध साक्ष्य और न्यायिक प्रक्रिया अहम होंगे। परिवार को न्याय दिलाने के लिए जरूरी है कि घटना की निष्पक्ष जांच हो और दोष तय करने का फैसला सबूतों तथा कानून के आधार पर किया जाए।