सरकार के मुताबिक, इस फैसले से देशभर में 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा कवरेज के दायरे में आ सकते हैं। ₹15,000 से ₹25,000 प्रति माह वेतन पाने वाले कर्मचारियों को EPF, EPS और EDLI जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ लागू नियमों के अनुसार मिलेगा।
उत्तराखंड के कर्मचारियों पर भी पड़ेगा असर
उत्तराखंड में यह बदलाव खास तौर पर उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी मासिक मजदूरी या वेतन पहले ₹15,000 की सीमा से ऊपर होने के कारण अनिवार्य EPFO कवरेज से बाहर हो जाता था। हालिया आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में अकुशल श्रमिकों की वैधानिक न्यूनतम मजदूरी भी ₹15,220 के आसपास है, जो पुरानी EPFO वेतन सीमा से अधिक थी। ऐसे में नई ₹25,000 की सीमा से सामाजिक सुरक्षा कवरेज का दायरा बढ़ने की संभावना है।
12 साल बाद बदली EPFO की वेतन सीमा
EPFO की वेतन सीमा में यह बदलाव करीब 12 साल बाद हुआ है। इससे पहले सितंबर 2014 में इसे ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 किया गया था। अब 17 सितंबर 2026 से नई सीमा ₹25,000 कर दी गई है।
सरकार का कहना है कि वेतन, न्यूनतम मजदूरी और जीवन-यापन की लागत में पिछले वर्षों के दौरान हुए बदलाव को देखते हुए EPFO की सीमा बढ़ाने की जरूरत थी। नई व्यवस्था का उद्देश्य अधिक कर्मचारियों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ना है।
EPF के साथ पेंशन और बीमा का भी मिलेगा कवरेज
नई सीमा के तहत पात्र कर्मचारियों को EPFO से जुड़ी तीन प्रमुख योजनाओं—Employees' Provident Fund (EPF), Employees' Pension Scheme (EPS) और Employees' Deposit Linked Insurance (EDLI)—का कवरेज मिलेगा। हालांकि, वास्तविक लाभ संबंधित योजना के नियमों और कर्मचारी की पात्रता पर निर्भर करेगा।
EPFO की नई सीमा से कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा मजबूत होने के साथ उनकी सेवानिवृत्ति बचत में भी बदलाव आएगा। वहीं, अधिक योगदान के कारण कुछ कर्मचारियों के हाथ में आने वाली मासिक राशि पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि कंपनियां बढ़ी हुई लागत को अपने मौजूदा CTC ढांचे में समायोजित करने की कोशिश कर सकती हैं।
इस फैसले के बाद उत्तराखंड समेत देशभर में नए कर्मचारियों के EPFO कवरेज का दायरा बढ़ेगा और ₹15,000 से ₹25,000 के वेतन वर्ग के बड़ी संख्या में कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ सकेंगे।