मिली जानकारी के अनुसार, संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का धरना 8 अक्टूबर से सीएमओ कार्यालय पर जारी है। कर्मचारी कार्य बहिष्कार कर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवाएं देने के बावजूद उन्हें उचित मानदेय और नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
दूसरी ओर, आशा संगिनी भी अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठी हैं। उनकी प्रमुख मांगों में मानदेय में बढ़ोतरी और राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाना शामिल है। आशा संगिनी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में वे अपनी सेवाओं के अनुरूप बेहतर मानदेय और कर्मचारी संबंधी सुविधाओं की मांग कर रही हैं।
संविदा कर्मचारियों ने थाली और शंख बजाकर अपनी मांगों की ओर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। कार्य बहिष्कार और धरने के माध्यम से कर्मचारी अपनी मांगों पर ठोस निर्णय लिए जाने की मांग कर रहे हैं।
फर्रुखाबाद में आशा संगिनी और संविदा कर्मचारियों के आंदोलन के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्वास्थ्य विभाग और शासन उनकी मांगों पर क्या कदम उठाते हैं। कर्मचारियों की मांगों और धरने को लेकर विभाग की ओर से किसी आधिकारिक निर्णय या प्रतिक्रिया की पुष्टि होने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।