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फर्रुखाबाद में बाढ़ का बढ़ता संकट, गंगा-रामगंगा के बढ़ते जलस्तर से गांवों में दहशत

फर्रुखाबाद जिले में गंगा और रामगंगा नदियों के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। कई गांवों में पानी पहुंचने से जनजीवन प्रभावित हुआ है, जबकि सड़क संपर्क बाधित होने और कटान की समस्या ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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फर्रुखाबाद में बाढ़ का बढ़ता संकट, गंगा-रामगंगा के बढ़ते जलस्तर से गांवों में दहशत
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INDC Network : फर्रुखाबाद। जिले में गंगा और रामगंगा नदियों का जलस्तर बढ़ने के साथ बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है। नदियों के उफान के कारण कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। खेतों में पानी भरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है, वहीं ग्रामीणों को आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

12 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, जिला प्रशासन ने 33 गांवों के 23,367 लोगों और 4,855 परिवारों के प्रभावित होने की जानकारी दी थी। वहीं, जमीनी रिपोर्टों में करीब 60 गांवों तक बाढ़ का पानी पहुंचने की बात सामने आई थी। बाढ़ के कारण कई स्थानों पर सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है और कटान की समस्या भी सामने आई है। राजेपुर क्षेत्र में स्थिति अधिक गंभीर बताई गई, जिसके चलते फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग को बंद करना पड़ा। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज किए जाने की बात कही गई है।

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बाढ़ प्रभावित लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 35 चिकित्सा शिविर लगाए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन शिविरों में 536 लोगों का उपचार किया गया तथा ओआरएस और क्लोरीन की गोलियां वितरित की गईं। पशुपालन विभाग ने भी पशु चिकित्सा शिविर लगाकर उपचार और टीकाकरण किया।

फर्रुखाबाद के लिए गंगा और रामगंगा दोनों नदियां बाढ़ के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बाढ़ संबंधी रिपोर्ट में फर्रुखाबाद को गंगा/रामगंगा नदी बेसिन से प्रभावित जिलों में शामिल किया गया है। रिपोर्ट में भारी बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से पानी छोड़े जाने को बाढ़ की स्थिति बिगड़ने के प्रमुख कारणों में बताया गया है।

बाढ़ की स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीण इलाकों में सुरक्षित आवागमन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था की होती है। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है।

फिलहाल ग्रामीणों की नजर गंगा और रामगंगा के जलस्तर पर बनी हुई है। यदि नदियों का जलस्तर आगे भी बढ़ता है तो निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। प्रशासन की ओर से लोगों से सतर्क रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक जोखिम न लेने की अपील की गई है।