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फर्रुखाबाद: थाने से रिहाई के बाद भी शहेजान मंसूरी के घर पर पुलिस तैनात, हाउस अरेस्ट से इनकार; कार्रवाई पर उठे सवाल

फर्रुखाबाद में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन करने वाले शहेजान मंसूरी को पुलिस ने 9 अक्टूबर की रात हिरासत में लिया था। करीब 22 घंटे बाद थाने से रिहाई के बावजूद, खबर लिखने तक उनके घर पर दिन-रात पुलिसकर्मियों की तैनाती है। अधिकारी इसे हाउस अरेस्ट के बजाय सुरक्षा व्यवस्था बता रहे हैं, लेकिन बिना लिखित आदेश पुलिस तैनाती को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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फर्रुखाबाद: थाने से रिहाई के बाद भी शहेजान मंसूरी के घर पर पुलिस तैनात, हाउस अरेस्ट से इनकार; कार्रवाई पर उठे सवाल
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INDC Network : फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश। जनपद के टाउन हॉल पार्क में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले शहेजान मंसूरी को थाने से रिहाई के बाद भी राहत नहीं मिली है। उनका कहना है कि 15 अक्टूबर 2026 तक उनके घर पर दिन-रात पुलिसकर्मी तैनात हैं। अधिकारियों से संपर्क करने पर इसे हाउस अरेस्ट मानने से इनकार किया जा रहा है और पुलिस की तैनाती को उनकी सुरक्षा से जोड़कर बताया जा रहा है।

9 अक्टूबर की रात हिरासत, करीब 22 घंटे बाद रिहाई

जानकारी के अनुसार, शहेजान मंसूरी 8 अक्टूबर से फर्रुखाबाद के टाउन हॉल पार्क में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। उन्हें 9 अक्टूबर की रात करीब 10:30 बजे प्रदर्शन स्थल से पुलिस अपने साथ ले गई और थाना मऊ दरवाजा में रखा गया। वह करीब 22 घंटे तक थाने में रहे। बताया गया है कि किसान संगठनों, आम आदमी पार्टी के नेताओं और अन्य लोगों की ओर से दबाव बनाए जाने के बाद पुलिस ने उन्हें थाने से रिहा कर दिया। लेकिन शहेजान का कहना है कि रिहाई के बाद भी पुलिस उनके घर पर लगातार मौजूद है।

पुलिस कह रही सुरक्षा, उठ रहे सवाल

शहेजान मंसूरी के अनुसार, जब अधिकारियों से घर पर पुलिस की मौजूदगी को लेकर सवाल किया जाता है, तो जवाब मिलता है कि यह हाउस अरेस्ट नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी लगाए गए हैं। उनका कहना है कि घर पर दिन-रात पुलिस की मौजूदगी के कारण वे इसे अपनी स्वतंत्रता पर पाबंदी के रूप में देख रहे हैं। इस मामले में प्रमुख सवाल यह है कि यदि पुलिस की तैनाती केवल सुरक्षा के लिए है, तो उसका आधार क्या है? क्या इस संबंध में कोई लिखित आदेश या सुरक्षा आकलन मौजूद है? खबर लिखे जाने तक इस बारे में कोई स्पष्ट लिखित आदेश या विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।

कानून और नागरिक स्वतंत्रता को लेकर उठे सवाल

इस मामले को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि किसी नागरिक के घर पर लगातार पुलिसकर्मियों की तैनाती का कानूनी आधार क्या है और क्या संबंधित व्यक्ति को इसकी लिखित जानकारी दी गई है। यदि पुलिस इसे सुरक्षा व्यवस्था बता रही है, तो सुरक्षा की आवश्यकता, उसकी अवधि और लागू प्रक्रिया के बारे में स्पष्टता जरूरी है।
शहेजान मंसूरी के पक्ष की ओर से सवाल किया जा रहा है कि यदि किसी व्यक्ति के घर पर चोरी जैसी घटना होती है, तो क्या पुलिस उसकी सुरक्षा के नाम पर 24 घंटे उसके घर पर तैनात रहती है, या अपराध की जांच और आरोपियों को पकड़ने की कार्रवाई करती है? यह सवाल पुलिस की मौजूदा व्यवस्था को लेकर उठाया जा रहा है।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ था आंदोलन

शहेजान मंसूरी ने 8 अक्टूबर को फर्रुखाबाद के टाउन हॉल पार्क में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था। आंदोलन का उद्देश्य उनकी जवाबदेही तय करने और इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध दर्ज कराना था। फिलहाल टाउन हॉल पार्क में आंदोलन शांत पड़ने की बात कही जा रही है, लेकिन शहेजान मंसूरी के घर पर पुलिस की मौजूदगी को लेकर विवाद बना हुआ है।

खबर लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से इस मामले में विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया था। अब सवाल यह है कि क्या पुलिस की तैनाती के संबंध में कोई लिखित आदेश है और शहेजान मंसूरी की आवाजाही पर कोई प्रतिबंध लगाया गया है या नहीं। इन सवालों पर प्रशासन की स्पष्ट प्रतिक्रिया का इंतजार है।