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Biography

लाल बहादुर शास्त्री की जीवनी: सादगी, संघर्ष और देशसेवा की प्रेरक कहानी

लाल बहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे। सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए प्रसिद्ध शास्त्री जी ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर प्रधानमंत्री पद तक देश की सेवा की। जानिए उनके जीवन, राजनीतिक सफर और महत्वपूर्ण योगदान की पूरी कहानी।
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लाल बहादुर शास्त्री की जीवनी: सादगी, संघर्ष और देशसेवा की प्रेरक कहानी
Lal Bahadur Shastri
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लाल बहादुर शास्त्री: जीवन परिचय

लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। उनके पिता शारदा प्रसाद श्रीवास्तव एक शिक्षक और बाद में राजस्व विभाग में कार्यरत थे, जबकि उनकी माता रामदुलारी देवी थीं। पिता के निधन के बाद उनका पालन-पोषण कठिन परिस्थितियों में हुआ।

बचपन से ही शास्त्री जी सादगी और अनुशासन के लिए जाने जाते थे। उन्होंने काशी विद्यापीठ से शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 1926 में उन्हें ‘शास्त्री’ की उपाधि मिली। इसके बाद उन्होंने अपने नाम के साथ शास्त्री को अपनाया।

स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान

लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित थे। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलनों में हिस्सा लिया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।

आजादी के बाद उन्होंने भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वे उत्तर प्रदेश सरकार में परिवहन और पुलिस जैसे विभागों से जुड़े रहे। बाद में केंद्र सरकार में भी उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।

भारत के दूसरे प्रधानमंत्री

27 मई 1964 को जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद लाल बहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल लगभग 19 महीने का रहा।

उनके कार्यकाल में भारत को खाद्य संकट और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने किसानों और सैनिकों के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रसिद्ध नारा “जय जवान, जय किसान” दिया।

1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध

1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ। उस समय प्रधानमंत्री के रूप में शास्त्री जी ने देश का नेतृत्व किया। युद्ध के दौरान उन्होंने देशवासियों से एकजुट रहने और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों को निभाने की अपील की।

युद्ध के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने के लिए ताशकंद समझौता हुआ। शास्त्री जी ने 10 जनवरी 1966 को इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

निधन

ताशकंद समझौते के अगले दिन 11 जनवरी 1966 को लाल बहादुर शास्त्री का ताशकंद में निधन हो गया। वे भारत के उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिनकी पहचान सादगी, ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन में अनुशासन के लिए बनी।

हर वर्ष 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी के साथ लाल बहादुर शास्त्री की जयंती भी मनाई जाती है। उनका जीवन आज भी देशसेवा और सादगी के उदाहरण के रूप में याद किया जाता है।