क्या है पूरा मामला?
यह मामला मार्च 2025 में मेरठ में हुई सौरभ राजपूत की हत्या से जुड़ा है। सौरभ पूर्व मर्चेंट नेवी अधिकारी थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 3 मार्च 2025 को उनकी हत्या की गई और शव के टुकड़ों को एक नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखकर सीमेंट और रेत से छिपाने की कोशिश की गई। इसी वजह से यह मामला देशभर में ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ के नाम से चर्चित हुआ।
126 सुनवाइयों और 22 गवाहों के बाद फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में 126 सुनवाइयां हुईं और अभियोजन पक्ष के 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए दोनों दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। अदालत ने दोनों को हत्या और सबूत मिटाने से जुड़े अपराधों में दोषी ठहराने के बाद सजा सुनाई।
अब आगे क्या होगा?
मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद भी कानूनी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। कानून के तहत मौत की सजा को संबंधित हाईकोर्ट से पुष्टि मिलना आवश्यक है। दोषियों को फैसले के खिलाफ कानून के अनुसार अपील करने का अधिकार भी है। मेरठ के इस चर्चित मामले में अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर नीला ड्रम हत्याकांड सुर्खियों में आ गया है।