प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि निफाड शहर और आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उनके मुताबिक, बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि इलाके में कुत्तों के काटने की कई घटनाएं सामने आई हैं और प्रशासन को बार-बार शिकायतें एवं ज्ञापन देने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्याधिकारी की मेज पर नोटों की माला भी रखी। उनका कहना था कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए जमीन पर कार्रवाई की जरूरत है। प्रदर्शनकारियों ने कुत्तों की नसबंदी, उन्हें पकड़ने के लिए व्यवस्था और उनकी संख्या नियंत्रित करने की मांग की।
मुख्याधिकारी धीरज भामरे की ओर से कहा गया कि नगर पंचायत ने आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए प्रक्रिया शुरू की है और समस्या के समाधान के लिए आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे दोबारा विरोध प्रदर्शन करेंगे।
इस बीच, घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया। महाराष्ट्र की रिपोर्टों के अनुसार, निफाड पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने और पशुओं के साथ कथित क्रूर व्यवहार से संबंधित मामला दर्ज किया है। रिपोर्टों में बताया गया है कि मामले में विक्रम रणदिवे, उनकी पत्नी और अन्य समर्थकों के नाम शामिल हैं।
घटना ने निफाड में आवारा कुत्तों की समस्या और स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई को लेकर चल रही बहस को फिर सामने ला दिया है।