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पिता की मौत के बाद अब्दुल ने ठुकराया मुआवजा, मांगा गरीब बच्चों के लिए वर्ल्ड-क्लास स्कूल

पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा में सरकारी स्कूल की बदहाली का वीडियो बनाने के बाद अब्दुल हाफिज और उनके पिता पर हमले का आरोप लगा। पिता की मौत के बाद अब्दुल ने मुआवजे के बजाय उनके नाम पर गरीब बच्चों के लिए वर्ल्ड-क्लास स्कूल बनाने की मांग की।
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पिता की मौत के बाद अब्दुल ने ठुकराया मुआवजा, मांगा गरीब बच्चों के लिए वर्ल्ड-क्लास स्कूल
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INDC Network: बांकुड़ा, पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले से सामने आई एक घटना इन दिनों चर्चा में है। यहां सरकारी स्कूल की बदहाल स्थिति को सामने लाने के लिए अभियान में शामिल हुए अब्दुल हाफिज के पिता की हमले में घायल होने के बाद मौत हो गई। इसके बाद अब्दुल ने मुआवजे की रकम लेने के बजाय सरकार के सामने एक अलग और बड़ी मांग रखी है। उन्होंने अपने दिवंगत पिता के नाम पर गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए एक वर्ल्ड-क्लास स्कूल बनाने की मांग की है।

स्कूल की बदहाली का वीडियो बनाने पहुंचे थे अब्दुल

रिपोर्टों के मुताबिक, बांकुड़ा के इंदास थाना क्षेत्र के कड़िशुंडा गांव निवासी अब्दुल हाफिज अपने पुराने सरकारी स्कूल, कड़िशुंडा प्राथमिक विद्यालय, की स्थिति देखने पहुंचे थे। अब्दुल इसी स्कूल में पढ़ चुके हैं। वह 'School Thik Karo' अभियान के तहत स्कूल की आधारभूत सुविधाओं और बदहाल स्थिति का वीडियो बना रहे थे।

अब्दुल का आरोप है कि स्कूल से लौटने के बाद रात में कुछ लोग उनके घर पहुंचे और उनके साथ तथा उनके बुजुर्ग पिता के साथ मारपीट की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनका मोबाइल फोन छीनकर स्कूल से बनाए गए वीडियो डिलीट करवाए गए और उन्हें भविष्य में इस तरह के वीडियो बनाने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।

हमले में गंभीर रूप से घायल हुए पिता

अब्दुल के मुताबिक, हमले में उनके पिता के सिर पर गंभीर चोट आई थी। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बाद में उनकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घायल बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाया गया। मामले में कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने की बात भी सामने आई है।

हालांकि, घटना के पीछे राजनीतिक वजह और आरोपियों की पहचान को लेकर जांच जारी है। CJP की ओर से आरोप लगाया गया है कि हमले में BJP से जुड़े लोग शामिल थे, जबकि BJP की ओर से कहा गया है कि यदि उसके कार्यकर्ताओं की संलिप्तता सामने आती है और शिकायत दर्ज होती है तो कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस ने भी मामले के राजनीतिक कनेक्शन समेत सभी पहलुओं की जांच की बात कही है।

मुआवजे के बजाय स्कूल की मांग

पिता की मौत के बाद अब्दुल की मांग ने इस पूरे मामले को एक अलग दिशा दे दी है। अब्दुल का कहना है कि उनके पिता की मौत की भरपाई सिर्फ पैसों से नहीं हो सकती। उन्होंने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि यदि परिवार के लिए मुआवजे की व्यवस्था की जाती है, तो उस रकम का इस्तेमाल उनके पिता के नाम पर गरीब बच्चों के लिए एक बेहतर स्कूल बनाने में किया जाए।

अब्दुल की सोच है कि अगर इस पैसे से एक आधुनिक और बेहतर स्कूल बनाया जाता है, तो इससे लंबे समय तक गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को फायदा मिल सकता है। उन्हें बेहतर शिक्षा, अच्छी सुविधाएं और आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे।

शिक्षा को बनाना चाहते हैं बदलाव का माध्यम

अब्दुल की मांग केवल एक स्कूल बनाने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे उनका संदेश यह है कि किसी भी समाज में स्थायी बदलाव शिक्षा के जरिए लाया जा सकता है। जिस सरकारी स्कूल की बदहाली को सामने लाने के लिए वह अभियान का हिस्सा बने थे, उसी शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने अपने पिता की स्मृति को जोड़ने की अपील की है।

यदि सरकार उनकी मांग पर विचार करती है और उनके पिता के नाम पर गरीब बच्चों के लिए एक आधुनिक विद्यालय स्थापित किया जाता है, तो यह उनके परिवार की त्रासदी की स्मृति के साथ-साथ जरूरतमंद बच्चों के भविष्य के लिए भी एक सकारात्मक पहल हो सकती है।

फिलहाल बांकुड़ा की इस घटना में पुलिस जांच जारी है और हमले के कारणों तथा आरोपियों की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। इस बीच अब्दुल की मुआवजे के बजाय शिक्षा के लिए स्कूल बनाने की मांग चर्चा का विषय बनी हुई है।