नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका की जमानत सुनवाई के बीच दिल्ली में एक नया विवाद सामने आया है। मामले की सुनवाई कर रहे विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) ने कथित तौर पर धमकी भरे संदेश मिलने की शिकायत की है। इस शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। 19 अक्टूबर 2026 को इस मामले में दोनों नेताओं की हिरासत बढ़ाने की पुलिस की मांग और जमानत की सुनवाई चर्चा में रही।
मजिस्ट्रेट को धमकी मिलने की शिकायत
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने शिकायत दी कि दोनों नेताओं की रिहाई से जुड़े मामले की कार्यवाही के दौरान उन्हें धमकी मिली। इसके बाद पुलिस ने संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू की। शुरुआती रिपोर्टों में धमकी देने वाले व्यक्ति की पहचान और संदेश के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई थी।
CJP ने जमानत में देरी का लगाया आरोप
CJP की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि सौरव दास और आशुतोष रांका की जमानत प्रक्रिया में देरी की जा रही है। उनका कहना था कि सुनवाई दोपहर 12 बजे निर्धारित थी, लेकिन कार्यवाही शाम तक खिंच गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि जमानत से संबंधित औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद जमानतदारों को स्वीकार नहीं किया गया।
पार्टी की ओर से सवाल उठाया गया कि मजिस्ट्रेट को मिली कथित धमकी का दोनों नेताओं की जमानत सुनवाई से क्या संबंध है। हालांकि, ये आरोप CJP की ओर से लगाए गए हैं। पुलिस ने धमकी देने वाले व्यक्ति की पहचान और घटना की परिस्थितियों के बारे में जांच शुरू की।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद हुई थी गिरफ्तारी
सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर कथित तौर पर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के मामले में हिरासत में लिया गया था। पुलिस के अनुसार, CJP के सदस्यों का एक समूह बंद गेट पार करके प्रदर्शन स्थल में पहुंचा था। वहां सदस्यों ने तिरंगा फहराया और नारे लगाए।
पुलिस ने आरोप लगाया कि समूह ने सुरक्षा व्यवस्था का उल्लंघन किया और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाली। इसके बाद दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
दिल्ली पुलिस ने मांगी हिरासत बढ़ाने की अनुमति
19 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं की हिरासत पांच दिन और बढ़ाने की मांग की। पुलिस का तर्क था कि रिहाई के बाद वे दोबारा प्रदर्शन का आह्वान कर सकते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होने की आशंका है। दूसरी ओर, सौरव दास और आशुतोष रांका ने कहा कि उनकी ओर से किसी नए प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया गया है और उन्हें जमानत मिलनी चाहिए।
यह मामला जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, दोनों नेताओं की गिरफ्तारी, जमानत प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट को कथित धमकी मिलने की शिकायत के कारण चर्चा में है। मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही और पुलिस जांच के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे।