INDC Network: लक्सर, उत्तराखंड: उत्तराखंड के लक्सर में पुलिस ने खून का अवैध कारोबार करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गिरोह ग्रामीण इलाकों में अवैध रूप से रक्तदान शिविर लगाकर लोगों से खून एकत्र करता था और उसे अधिकृत ब्लड बैंक में जमा कराने के बजाय उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में ऊंचे दामों पर बेचता था।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 27 यूनिट खून, 27 खाली ब्लड बैग, चार ब्लड डोनर चेयर, डोनर फॉर्म बुक और रक्त संग्रह से जुड़े कई उपकरण बरामद किए हैं। इसके अलावा दो संदिग्ध वाहन भी पुलिस के हाथ लगे हैं।
ग्रामीण इलाकों में लगाए जा रहे थे अवैध ब्लड कैंप
लक्सर कोतवाली प्रभारी प्रवीण सिंह कोश्यारी के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध रूप से रक्तदान शिविर आयोजित किए जाने की सूचना मिल रही थी। पुलिस ने सूचना को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।
जांच के दौरान सामने आया कि कुछ लोग गिरोह के रूप में काम कर रहे थे और ग्रामीण क्षेत्रों में शिविर लगाकर लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करते थे। रक्त एकत्र करने के बाद उसे अधिकृत ब्लड बैंक तक पहुंचाने के बजाय कथित तौर पर ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता था।
पांच आरोपियों की गिरफ्तारी
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अनित सैनी निवासी फतवा, लक्सर, शुभम कुमार निवासी माड़ाबेला, खानपुर, दुष्यन्त कुमार निवासी आवास विकास, कोतवाली सदर बिजनौर, कावेन्द्र कुमार निवासी हरतला, मुरादाबाद और दया सिंह निवासी इसमपुर ढाणा, थाना गिनौर, जनपद सम्भल को गिरफ्तार किया।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में रक्तदान शिविर आयोजित करने और एकत्र किए गए रक्त को अन्य स्थानों पर बेचने से जुड़ी जानकारी दी है।
27 यूनिट खून समेत कई सामान बरामद
पुलिस ने आरोपियों के पास से दो संदिग्ध स्विफ्ट और स्कॉर्पियो कार बरामद की हैं। वाहनों से 27 यूनिट खून और 27 खाली ब्लड बैग मिले।
इसके अलावा चार ब्लड डोनर चेयर, डोनर फॉर्म बुक, वेट मशीन, ब्लड यूनिट मापने की मशीन, स्लाइड, हाथ में बांधने वाली बेल्ट और अन्य सामान बरामद किया गया है। पुलिस को अमृत चैरिटेबल ब्लड सेंटर के 28 प्रमाणपत्र भी मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश
पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की तह तक जाने में जुटी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह ने अब तक कितने स्थानों पर अवैध रक्तदान शिविर लगाए और इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पूछताछ के दौरान सामने आए नामों और अन्य सुरागों के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई कर सकती है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
आरोपियों को भेजा गया जेल
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस अब बरामद खून और अन्य सामग्री के स्रोत तथा इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
रक्तदान को जीवन बचाने वाला मानवीय कार्य माना जाता है। ऐसे में यदि रक्त को अवैध तरीके से एकत्र कर व्यावसायिक लाभ के लिए बेचे जाने की पुष्टि होती है, तो यह न केवल गंभीर आपराधिक मामला है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा माना जा सकता है।